कितना कुछ घटित हो रहा है हमारे सामने आज कल..
हम सब कहीं न कहीं इस घटने में शामिल होते हैं..
प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष ही...
हम विकास कर रहे हैं किन्तु असंवेदनशील होकर?
दया, त्याग, सहिष्णुता, संवेदनशीलता को ताक पर रख कर....

Comments

Popular posts from this blog

इन दिनों

नमस्कार भाई साब!

अन्धविश्वास (लघु कथा)