तुम्हारे बाद

इन दिनों तुम नहीं हो।

इन्हीं दिनों में कभी तुम थी भी।

मैं न होने को नहीं मानता, मैं जानता हूँ हो चुके को।

जो हो चुका है अनहुआ नहीं हो सकता।

जो नहीं हुआ है अनछुआ ही रहेगा।

अनछुए की कोई स्मृति नहीं होती। 

स्पर्श की होती है जैसे हुए की होती है।


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